tag:blogger.com,1999:blog-10933538.post112092566821680311..comments2007-04-16T01:54:03.907+05:30Comments on ~ प्रेमपीयूष ~: कविता की अर्थीPrem Piyushnoreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-10933538.post-1121113416180564062005-07-12T01:53:00.000+05:302005-07-12T01:53:00.000+05:30अनूप जी,काश पहले आकर इक बार पुछते ।भुले को याद वो ...अनूप जी,<BR/>काश पहले आकर इक बार पुछते ।<BR/>भुले को याद वो इक प्यार दिलाते ।<BR/><BR/>खुदगर्जी कंधों को रोक तुम लेते ।<BR/>उसे एक बार फिर जिला जो देते।प्रेम पीयूषhttp://www.blogger.com/profile/13449062041157766221noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10933538.post-1121017026443060902005-07-10T23:07:00.000+05:302005-07-10T23:07:00.000+05:30'कलमों के सेज पर कविता की अर्थी 'सेज पर जो कविता क...'कलमों के सेज पर कविता की अर्थी '<BR/>सेज पर जो कविता की अर्थी थी उसको कंधा कौन दे रहा था?अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.com