15 जुलाई, 2005

चिट्ठाकार मंडली नमो नमः ।

ब्लाग कहो या चिट्ठा ,खट्टा हो या मीठा
सुलेख हो या कुलेख, मिले तालियाँ या गालियाँ ।

जो मन में आये लिखो, सीखो या सिखाओ
मुफ्त़ में मेरे जैसा कवि-लेखक बन जाओ ।

देशी बोली में कुछ सुनाओ, हम सब दोपाया जन्तु हैं
यहाँ भी कई दल हैं, अच्छे-भले और चपल तन्तु हैं ।

जय रामजी की, अपनी तो एक ही तसल्ली है
अनिर्मित सेतु बनाने को, हमारी एक बानर टोली है ।

चिट्ठाकार मंडली नमो नमः ।

3 टिप्पणी

At 7/16/2005 10:32:00 pm, Blogger अनूप शुक्ला कहते हैं...

वानर सेना की उछलकूद जारी रहे यही कामना है।

 
At 7/20/2005 07:10:00 pm, Blogger संजय विद्रोही कहते हैं...

Prem Piyush,

aapka blog dekha...bada "Natkhat" lekhan hai tumhara, yaar. Man halka ho gaya aur pet bhari.....taro-taza karne ke liye shukriya.
......milte rahenge.

-Sanjay Vidrohi

 
At 7/21/2005 05:41:00 pm, Blogger Nitin Bagla कहते हैं...

बहुत सही कहा...मेरे जैसे लोगों पर आपका दूसरा छन्द एकदम सटीक बैठता है...

 

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